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समरनीति स्पेशल

मध्यप्रदेश के इस गांव में सभी को मुफ्त बांटा जाता है दूध और दही, बड़ी रौचक है इसकी यह वजह..

मध्यप्रदेश के इस गांव में सभी को मुफ्त बांटा जाता है दूध और दही, बड़ी रौचक है इसकी यह वजह..

समरनीति न्यूज, डेस्कः क्या आप सोच सकते हैं कि आज के दौर में एक गांव ऐसा भी होगा, जहां दूध और दही फ्री में मिलता हो। जी हां, अजीब सी लगने वाली यह बात सौ फीसद सच है। दरअसल, मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में एक ऐसा ही गांव है जहां दूध और दही आज भी फ्री मिलता है। यही वजह है कि लोग बिल्कुल स्वस्थ और तंदरुस्त हैं, क्योंकि यहां दूध और दही बेचा नहीं जाता है। इस गांव का नाम चूड़िया है। लगभग100 वर्षों से इसी परंपरा का निर्वहन   बताया जाता है कि इस गांव के लोग दूध का व्यापार नहीं करते हैं और पालक खुद दूध और दही का इस्तेमाल खाने-पीने के लिए करते हैं। इतना ही नहीं जरूरतमंदों को मुफ्त में देते हैं। गांव के लोग अपनी इस अनोखी परंपरा को बीते करीब 100 साल से निभा रहे हैं। इस गांव में दूध का व्यापार नहीं किया जाता है। यह है गांव वालों के दूध न बेचने की वजह बताते हैं कि इस गांव में करीब 100 साल पहले एक गोसेवक
बुंदेलखंड के इस गांव में नहीं जलाई जाती होली, वजह जानकर चौंक जाएंगे आप..

बुंदेलखंड के इस गांव में नहीं जलाई जाती होली, वजह जानकर चौंक जाएंगे आप..

समरनीति न्यूज, बांदाः बुधवार रात देश के कोने-कोने में होली जलाई गई, लेकिन बुंदेलखंड का एक गांव ऐसा भी है जहां होली नहीं जलाई जाती है। दरअसल, होली जलाए जाने का जिक्र आते ही इस गांव के लोग बुरी तरह से सहम जाते हैं। बीते कई दशकों से इस गांव में होलिका दहन नहीं होता है। आइये हम बताते हैं आपको इसकी वजह क्या है। दरअसल, यह गांव है मध्यप्रदेश के हिस्से में आने वाले सागर जिले के देवरी विकासखंड के हथखोह गांव। इस गांव में आज भी होलिका दहन का जिक्र लोगों के लिए किसी भयावह सपने से कम नहीं है। होली का न उत्साह, न कोई उमंग  यही वजह है कि होलिका दहन को लेकर इस गांव में, न तो कोई उत्साह नजर आता है और न ही किसी तरह की कोई खुशी या उमंग ही लोगों में दिखाई देती है। यहां होली की रात भी दूसरी सामान्य रातों की तरह ही रहती है। इस गांव में होली न जलाने के पीछे एक किवदंती यह है कि दशकों पहले गांव मे
बेटियों की बहादुरी के स्वर्णिम बुंदेली इतिहास को दोहरातीं बांदा की प्रीति..

बेटियों की बहादुरी के स्वर्णिम बुंदेली इतिहास को दोहरातीं बांदा की प्रीति..

(महिला दिवस विशेष)  समरनीति न्यूज, डेस्कः आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस मौके पर महिलाओं की भूमिका की बात करें तो शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा जहां महिलाओं ने अपनी काबलियत का लोहा न मनवाया हो। बुंदेलखंड में बेटियों की बहादुरी और हिम्मतवर भूमिका का एक बेहद स्वर्णिम इतिहास रहा है। आज भी यहां की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी का लोहा मनवा रहीं हैं। बांदा की ऐसी ही एक बहादुर बेटी हैं प्रीति। जी हां, अपनी बहादुरी के बल पर प्रीति आज ऐसे मुकाम को हांसिल कर चुकी हैं कि जहां अब उनको किसी पहचान का मोहताज होने की जरूरत नहीं है। सशस्त्र सीमा बल में असिस्टेंट कमांडेंट हैं बांदा की प्रीति शर्मा यह प्रीति की बहादुरी का ही प्रमाण है कि वह जल्द ही आतंक और जातीय हिंसा से जूझ रहे मध्य अफ्रीकी देश कांगो भेजी जा रही सशस्त्र सीमा बल यानि एसएसबी की टुकड़ी का नेतृत्व करने जा रहीं हैं। दरअसल, बांदा के
पत्नी से बचने के लिए दफ्तर में सो जाते थे अब्राहम लिंकन, घरेलू कलह से जूझते रहे जिंदगीभर

पत्नी से बचने के लिए दफ्तर में सो जाते थे अब्राहम लिंकन, घरेलू कलह से जूझते रहे जिंदगीभर

समरनीति न्यूज, डेस्कः अगर आपके जीवन में पत्नी से अनबन और झगड़ा-फसाद के हालात हैं तो यह मत समझिये कि आप ही परेशान हैं बल्कि इस दुनिया के कई महान लोग भी इस तरह के हालात से जूझते रहे हैं। फिर भी उन्होंने अपने सफल कार्यों से दुनिया में अमिट छाप छोड़ी है। ऐसा ही एक नाम है अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का। अगर अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट पर गौर करें तो पता चलता है कि अब्राहम लिंकन अमेरिका के सबसे सफल राष्ट्रपतियों में से एक थे लेकिन उनका दांपत्य जीवन काफी कलहपूर्ण रहा था। आक्रमक और कलहपूर्ण थीं पत्नी मैरी डाट  उनके जीवनीकारों ने यहां तक लिखा है कि लिंकन के दांपत्य जीवन में हालात इतने खराब थे कि कई बार पत्नी से झगड़े और कलह से बचने के लिए लिंकन अपने दफ्तर में ही सो जाते थे। कहा जाता है कि उन्होंने पूरी जिंदगी खुद को पत्नी से परेशान ही पाया। दरअसल, कहा तो यहां तक जाता है कि लिंकन ने अपनी
तो क्या राजनीति का केन्द्र बन रहा है कोलकाता..

तो क्या राजनीति का केन्द्र बन रहा है कोलकाता..

प्रीति सिंह,  पोलिटिकल डेस्कः कोलकाता की सरगर्मी पूरे देश में महसूस की जा रही है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के धरने पर बैठने के बाद से सियासी गर्मी तेज हो गई है जिस तरह लोगों का हुजूम सड़कों पर दिखा उससे कोलकाता राजनीति का केन्द्र बनता दिख रहा है। ममता बनर्जी ने जिस तरह मोदी और शाह के खिलाफ सड़क से हुंकार भरी है उससे जनता के साथ-साथ विपक्षी दल भी उनके साथ आ खड़े हुए हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल की 42 सीटों पर फतह का सपना आसान नहीं होगा, जबकि लोकसभा चुनाव का कभी भी ऐलान हो सकता है। लोकसभा चुनाव से पहले कोलकाता में राजनीतिक घटनाक्रम काफी तेजी से बदल रहा है जिस तरह पश्चिम बंगाल में बीजेपी तेजी से बड़ी ताकत बनकर उभर रही है, उससे ममता के साथ-साथ अन्य पार्टियों के लिए चिंता का विषय होना लाजिमी है। बीजेपी भी देख रही पश्चिम बंगाल में
मां और पुलिस का फर्ज बखूबी साथ-साथ निभा रहीं अर्चना..

मां और पुलिस का फर्ज बखूबी साथ-साथ निभा रहीं अर्चना..

समरनीति न्यूज, झांसीः एक तरफ मां की ममता और दूसरी ओर पुलिस जैसी जिम्मेदारी भरी नौकरी हो। तो भला किसकी हिम्मत जवाब नहीं दे जाएगी। लेकिन झांसी कोतवाली में तैनात एक महिला सिपाही का हौंसला लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जी हां, इस महिला सिपाही का नाम है अर्चना। अर्चना अपने कुछ माह के बेटे को साथ लेकर नौकरी भी कर रही हैं और उसकी परवरिश का भी ख्याल रख रही हैं। इस दोहरी जिम्मेदारी को बेहतर तालमेल के साथ अर्चना जिस बखूबी से निभा रही हैं। वह सचमुछ एक बड़ा उदारहण हैं। झांसी कोतवाली में तैनात है महिला सिपाही अर्चना  शायद यही वजह है कि सोशलमीडिया पर उनकी एक फोटो वायरल होने के बाद अधिकारियों ने भी उनकी इच्छाशक्ति की लोहा माना। इस फोटो में महिला सिपाही अर्चना ने अपने बेटे को सामने पड़ी टेबुल पर लिटाया हुआ है जो सो रहा है। वहीं वह खुद एक फरियादी की शिकायत दर्ज कर रही हैं। बांदा के ARTO की प
आम इंसान से औसतन 10-12 साल कम जिंदगी जीते हैं डाक्टर्स

आम इंसान से औसतन 10-12 साल कम जिंदगी जीते हैं डाक्टर्स

समरनीति न्यूजः अगर आप यह सोचते हैं कि जिंदगी में तनाव सिर्फ आपको ही परेशान कर रहा है तो यह गलत होगा। आपको तमाम बीमारियों से छुटकारा दिलाने वाले डाक्टर भी इससे अछूते नहीं हैं बल्कि डाक्टर्स की जिंदगी में तनाव इतना ज्यादा हावी है कि उनकी जिंदगी के कई साल कम कर देता है। जी हां, यह हैरान कर देने वाली बात सौ फीसद सच है। आईएमए की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा आया सामने  दरअसल, आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। आईएमए द्वारा केरल में डाक्टरों पर हुए एक अध्यन में खुलासा हुआ है कि आम आदमी की तुलना में डाक्टर औसतन 10-12 साल कम जीते हैं। ये भी पढ़ेंः ये डाक्टर्स बजाएंगे दुनियाभर में भारत का डंका, कर रहें हैं ऐसा काम.. अध्यन से प्राप्त आंकड़ों से हैरान कर देने वाली यह बात सामने आई है। माना जा रहा है कि इसके पीछे सबसे बड़ी भूमिका तनाव की है
सुरीली आवाज की बदौलत सफलता की बुलंदियों पर सीतापुर की आयुषी

सुरीली आवाज की बदौलत सफलता की बुलंदियों पर सीतापुर की आयुषी

समरनीति न्यूज, सीतापुरः पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान भरती है। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है। जी हां, कहावत सच कर दिखाई है सीतापुर की 21 साल की आयुषी ने। जिन्होंने अपनी छोटे भाई के सपने को साकार करने के लिए दिन-रात एक करके खुद को सफलता की उस बुलंदी पर पहुंचा दिया। जहां, पहुंचने में लोगों की आधी जिंदगी गुजर जाती है। गायिकी के क्षेत्र में अपने हुनर से लाखों दिलों पर राज कर रहीं       उत्तर प्रदेश के सीतापुर में मात्र 21 साल की युवती आयुषी पांडे बेहद कम वक्त में आज सफलता की बुलंदियां छू रहीं हैं। अपने परिवार ही नहीं बल्कि सीतापुर का नाम भी पूरे देश में रोशन कर रही हैं। वे अपनी सुरीली आवाज के दम पर आज लाखों दिलों पर राज कर रही हैं। आयुषी ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई सरस्वती विद्या मंदिर, सीतापुर से की। इसके बाद बीएससी की पढ़ाई के लिए लखीमपुर खीरी में
बुंदेलखंड में होता है महिलाओं का अनोखा दंगल, जहां घूंघट वालियां दिखाती हैं कुश्ती में दम-खम

बुंदेलखंड में होता है महिलाओं का अनोखा दंगल, जहां घूंघट वालियां दिखाती हैं कुश्ती में दम-खम

समरनीति  स्पेशलः  बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले के मुस्करा थाना के गांव लोदीपुर निवादा में कजलिया पर्व पर महिलाओं के दंगल मे घूंघटवाली बहुओं ने तरह-तरह के दांव पेंच दिखाए जाते हैं। कहीं सास पर बहू भारी पड़ती है तो कहीं सास ने बहू को पटखनी लगाकर चारों खाने चित्त कर दिया। सास से बहू, ननद से भौजाई और देवरानी-जेठानी के बीच होती है भिडंत  ननद-भौजाइयों के बीच हुई भिडंत में कहीं ननद का पलड़ा भारी रहता है तो कहीं भौजाइयां बाजी मार ले जाती है। घूंघट में लिपटीं देवरानियां-जेठानियां भी किसी से कम नहीं रहतीं। कई देवरानियां जेठानियों को धूल चटाती हैं तो कई जेठानियां अपनी देवरानियों को चारों खाने चित्त कर डालती हैं। ये भी पढ़ेंः अच्छी खबरः देश की बेटी विनेश फोगाट ने जकार्ता में दिखाया दम, जीत लाई सोना दंगल में बुआ और मौसियां भी अपने-अपने करतब दिखाती हैं। ज्यादातर मौसी बुअाओं पर भारी पड़ती हैं। म