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आम इंसान से औसतन 10-12 साल कम जिंदगी जीते हैं डाक्टर्स

समरनीति न्यूजः अगर आप यह सोचते हैं कि जिंदगी में तनाव सिर्फ आपको ही परेशान कर रहा है तो यह गलत होगा। आपको तमाम बीमारियों से छुटकारा दिलाने वाले डाक्टर भी इससे अछूते नहीं हैं बल्कि डाक्टर्स की जिंदगी में तनाव इतना ज्यादा हावी है कि उनकी जिंदगी के कई साल कम कर देता है। जी हां, यह हैरान कर देने वाली बात सौ फीसद सच है।

आईएमए की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा आया सामने 

दरअसल, आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। आईएमए द्वारा केरल में डाक्टरों पर हुए एक अध्यन में खुलासा हुआ है कि आम आदमी की तुलना में डाक्टर औसतन 10-12 साल कम जीते हैं।

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अध्यन से प्राप्त आंकड़ों से हैरान कर देने वाली यह बात सामने आई है। माना जा रहा है कि इसके पीछे सबसे बड़ी भूमिका तनाव की है। साथ ही डाक्टरों द्वारा सुसाइड भी इसकी बड़ी वजह है।

ये हैं डाक्टरों में तनाव के कारण  

डाक्टरों में तनाव के कई कारण हैं लेकिन इन कारणों पर गौर करें तो प्रमुख रूप से खास बातें सामने आती हैं जिनसे पता चलता है कि डाक्टरों की जिंदगी में तनाव के क्या-क्या कारण हैं।

  • बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद डाक्टरों का बड़ी संख्या में मरीजों को देखना और लगातार काम करना।
  • ज्यादातर डाक्टर 12 घंटे की शिफ्ट। 
  • डाक्टरों में थकान, अकेलापन और बीमारियों के अलावा डिप्रेशन हावी रहता है।
  • अधिकांश डॉक्टर 12-12  घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी देते हैं।  

छात्र जीवन से शुरू हो जाता है डाक्टरों को तनाव 

खास बात यह है कि डाक्टरों की जिंदगी में तनाव का सिलसिला छात्र जीवन से ही शुरू हो जाता है। बताया जाता है कि लगभग 15 से 30 प्रतिशत चिकित्सा छात्रों और मेडिकल रेजिडेंट्स में डिप्रेशन एक आम समस्या के तौर पर घर कर जाती है।

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बताते हैं कि कुछ डाक्टर्स में तनाव इस कदर हावी हो जाता है कि वे उनमें आत्महत्या की प्रवृति जन्म ले लेती है। ऐसे में कुछ बिना चिकित्सीय सलाह-मश्वरे के पेन किलर या दूसरी दवाएं लेने लगते हैं और गंभीर बीमारियों की ओर खुद को ले जाते हैं।

डाक्टर्स की सुसाइड घोषित है सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट  

आपको जानकर हैरानी होगी कि आईएमए यानि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने डाक्टर्स की सुसाइड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट घोषित कर रखा है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के अनुसार वर्ष 2018 की शुरुआत में लगभग 6 डॉक्टर को एम्स भर्ती कराया गया।

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इन डाक्टर्स को एक ही वक्त में एम्स के मनोचिकित्सा वार्ड में भर्ती कराया गया था। ये डॉक्टर तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे थे जिसकी वजह काम का दबाव और दूसरी वजहें थीं। यह स्थिति बताती है कि डाक्टर्स कितने तनाव में काम करते हैं।

बर्न आउट का शिकार हो रहीं महिला डाक्टर्स  

तनाव की यह स्थिति महिला डॉक्टरर्स पर भी बुरा असर डाल रही है। वर्क प्लेस और घर, दोनों जगह तालमेल बैठाते हुए महिला डाक्टर अक्सर तनाव में आ जाती हैं। यही वजह है कि महिला डॉक्टर्स में बर्न आउट का खतरा बना रहता है। देश में महिला विशेषज्ञों की कमी के कारण उनको ज्यादा काम करना पड़ता है।

 

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