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मध्यप्रदेश के इस गांव में सभी को मुफ्त बांटा जाता है दूध और दही, बड़ी रौचक है इसकी यह वजह..

सांकेतिक फोटो।

मनोज सिंह शुमाली, डेस्कः क्या आप सोच सकते हैं कि आज के दौर में एक गांव ऐसा भी होगा, जहां दूध और दही फ्री में मिलता हो। जी हां, अजीब सी लगने वाली यह बात सौ फीसद सच है। दरअसल, मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में एक ऐसा ही गांव है जहां दूध और दही आज भी फ्री मिलता है। यही वजह है कि लोग बिल्कुल स्वस्थ और तंदरुस्त हैं, क्योंकि यहां दूध और दही बेचा नहीं जाता है। इस गांव का नाम चूड़िया है।

लगभग 100 वर्षों से इसी परंपरा का निर्वहन

बताया जाता है कि इस गांव के लोग दूध का व्यापार नहीं करते हैं और पालक खुद दूध और दही का इस्तेमाल खाने-पीने के लिए करते हैं। इतना ही नहीं जरूरतमंदों को मुफ्त में देते हैं। गांव के लोग अपनी इस अनोखी परंपरा को बीते करीब 100 साल से निभा रहे हैं। इस गांव में दूध का व्यापार नहीं किया जाता है।

सांकेतिक फोटो।

यह है गांव वालों के दूध न बेचने की वजह

बताते हैं कि इस गांव में करीब 100 साल पहले एक गोसेवक संत चिन्ध्या बाबा हुआ थे, उनका गांव ही नहीं आसपास भी काफी यश फैला हुआ था। गांव के पुरोहित शिवचरण यादव बताते हैं कि चिन्ध्या बाबा ने गांव के लोगों से कहा था कि वे लोग दूध या उससे निर्मित चीजों न बेचें। बाबा ने कहा कि दूध में पानी मिलाकर बेचना बहुत बड़ा पाप है और इसको न करें। बस, इसके बाद ही गांव के लोगों ने बाबा की बात मानी और कभी दूध नहीं बेचा।

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बाबा की बात आज भी इस गांव के लिए पत्थर की लकीर की तरह है और तभी से गांव में दूध न बेचने की परंपरा बन गई। अब लोग मानते हैं कि दूध बेचने से कहीं न कहीं, किसी रूप में नुकसान हो सकता है। पीढ़ी दर पीढ़ी लोग अपने बुजुर्गों से बाबा की बात सुनते आ रहे हैं और उसका पालन भी कर रहे हैं।

सांकेतिक फोटो।

40 फीसद आदिवासी और इतने ही ग्वाले

बताते हैं कि लगभग ढाई-तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में 40 फीसद आदिवासी लोग रहते हैं और इतने ही प्रतिशत ग्वाले गांव में रहते हैं। बाकी 20 प्रतिशत में अन्य जातियों और वर्ग के लोग रहते हैं। गांव के लोग पशुपालन बड़े स्तर पर करते हैं। गांव के प्रमुख सुभाष पटेल का कहना है कि जिन घरों में दूध होता है और उनको मिलता है वे लोग पूरी तरह से स्वस्थ रहते हैं। बताया जाता है कि गांव का असली व्यवसाय खेती है, इसलिए दूध न भी बेचा जाए तो कोई आर्थिक दिक्कतें सामने नहीं आती है। वहीं बैतूल गांव के बैतूल के एसडीएम राजीव रंजन पांडे ने कहा कि उनको भी जानकारी मिली है कि गांव के लोग दूध नहीं बेचते हैं।

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