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बेटियों की बहादुरी के स्वर्णिम बुंदेली इतिहास को दोहरातीं बांदा की प्रीति..

(महिला दिवस विशेष) 

एसएसबी की असिस्टेंट कमांडेंट प्रीति शर्मा अपनी मां मीरा शर्मा के साथ।

समरनीति न्यूज, डेस्कः आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस मौके पर महिलाओं की भूमिका की बात करें तो शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा जहां महिलाओं ने अपनी काबलियत का लोहा न मनवाया हो। बुंदेलखंड में बेटियों की बहादुरी और हिम्मतवर भूमिका का एक बेहद स्वर्णिम इतिहास रहा है। आज भी यहां की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी का लोहा मनवा रहीं हैं। बांदा की ऐसी ही एक बहादुर बेटी हैं प्रीति। जी हां, अपनी बहादुरी के बल पर प्रीति आज ऐसे मुकाम को हांसिल कर चुकी हैं कि जहां अब उनको किसी पहचान का मोहताज होने की जरूरत नहीं है।

सशस्त्र सीमा बल में असिस्टेंट कमांडेंट हैं बांदा की प्रीति शर्मा

यह प्रीति की बहादुरी का ही प्रमाण है कि वह जल्द ही आतंक और जातीय हिंसा से जूझ रहे मध्य अफ्रीकी देश कांगो भेजी जा रही सशस्त्र सीमा बल यानि एसएसबी की टुकड़ी का नेतृत्व करने जा रहीं हैं। दरअसल, बांदा के रहने वाले पुलिस सब इंस्पेक्टर रामकुमार शर्मा की बेटी कु. प्रीति एसएसबी यानि सशस्त्र सीमा बल में असिस्टेंट कमांडेंट हैं।

माउंट गंगोत्री अभियान का नेतृत्व भी किया 

अपनी टीम के साथ अभियान के दौरान प्रीति शर्मा।

बुंदेलखंड के लिए यह गौरवपूर्ण बात है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति सेना में भारत की पहली महिला कमांडेंट प्रीति शर्मा, बांदा की रहने वाली हैं। बीते करीब डेढ़ साल से प्रीति शर्मा की पोस्टिंग लखीमपुर खीरी जिले में नेपाल से लगी सीमा पर है। बताया जाता है कि प्रीति ने वर्ष 2015 में संघ लोकसेवा आयोग की सीएपीएफ परीक्षा में आल इंडिया स्तर पर 73वीं रैंक हासिल हासिल करते हुए अपनी जगह बनाई थी।

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अपनी लखीमपुर तैनाती से पहले प्रीति झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाके में चार साल तक रहीं। इतना ही नहीं सीएपीएफ के माउंट एवरेस्ट अभियान में प्रथम महिला पर्वतारोही दल के कमांडर के रूप में प्रीति ने शानदार ढंग से अक्तूबर 2018 में माउंट गंगोत्री अभियान का नेतृत्व भी किया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रीति शर्मा।

कांगो में करेंगी SSB टुकड़ी का नेतृत्व

अब वह कांगो में एसएसबी की टुकड़ी का नेतृत्व करने जा रहीं हैं। गृह मंत्रालय की तरफ से भारतीय सेना की इनफेंट्री डिवीजन में SSB की पहली महिला कमांडर के रूप में कुमारी प्रीति नामित हुईं हैं। खुद प्रीति कहतीं हैं कि सीमा पर हमेशा उन्होंने यही कोशिश की है कि देश के दुश्मनों को सबक सिखाएं, यह एहसास भी कराएं की देश की बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं। प्रीति कहती हैं कि बेटियां खुद को साबित कर चुकी हैं और अब किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।

अपनी टीम के साथ प्रीति शर्मा।

कभी रुकीं नहीं, आगे बढ़ती रहीं प्रीति

बताते चलें कि प्रीति शर्मा ने बांदा के राजकीय महिला कालेज और जेएन कालेज से पढ़ाई पूरी की। इतिहास और राजनीति शास्त्र से परास्नातक करने वालीं प्रीति ने बीएड प्रवेश परीक्षा में प्रदेशभर में तीसरा स्थान हासिल किया। पढ़ाई के दौरान ही वह एनसीसी से जुड़ गईं और कमांडर रहीं।

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इसके बाद उन्होंने कुछ दिन शिक्षा को भी अपना कैरियर बनाया, लेकिन यह उनका आखिरी मुकाम नहीं था। उनको और ऊंची उड़ान उड़ना था और संघ लोकसेवा आयोग की सीएपीएफ परीक्षा-2015 को क्वालिफाई करते हुए प्रीति ने पूरे भारत में 73वीं रैंक हासिल कर पूरे बुंदेलखंड का सिर ऊंचा किया।

प्रीति शर्मा।

अच्छी गायिका भी हैं प्रीति

बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रीति शर्मा जिनती बहादुर हैं उतनी ही अच्छी गायिका भी हैं। उन्होंने शास्त्री संगीत गायन में प्रभाकर (स्नातक) किया हुआ है। बांदा के जाने-माने गायक और शिक्षक सुनील कुमार सनी का कहना है कि प्रीति बहुत अच्छी गायिका हैं और उन्होंने उनके साथ कई कार्यक्रमों में सहभागिता भी की है। उनकी मां मीरा शर्मा एक कुशल गृहणी हैं। प्रीति परिवार में पांच बहनों में चौथे नंबर की हैं। उनकी अन्य बहनें अंजना, रंजना, ज्योति और शिप्रा हैं। बताते हैं कि प्रीति को पिस्टल शूटिंग, पर्वतारोहण और घुड़सवारी में भी महारत हांसिल है।